प्रश्न 1
शीर्षक “सपनों के-से दिन” क्यों उपयुक्त है?
लेखक के लिए बचपन के दिन अब दूर और स्मृतिमय हो गए हैं। उनमें कठिनाई भी थी, लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर वे सपने जैसे लगते हैं।
NCERT संचयन भाग 2 · पूरक · गुरदयाल सिंह · CBSE 2026–27
लेखक अपने बचपन और स्कूल के दिनों को स्मृति में लौटकर देखता है। स्कूल का अनुशासन, मित्र, डर, खेल और शिक्षक के अनुभव उस समय को कभी कठिन और कभी सपनों जैसा बना देते हैं।
लेखक अपने बचपन और स्कूल के दिनों को स्मृति में लौटकर देखता है। स्कूल का अनुशासन, मित्र, डर, खेल और शिक्षक के अनुभव उस समय को कभी कठिन और कभी सपनों जैसा बना देते हैं।
उत्तर लिखने का तरीका: प्रश्न का सीधा उत्तर दीजिए, पाठ की घटना/भाव से प्रमाण दीजिए और अंत में उसे मुख्य विचार से जोड़िए। अपने शब्दों में लिखें; पाठ की पंक्तियाँ लंबी न उतारें।
अपने स्कूल जीवन की एक स्मृति लिखिए। फिर बताइए कि आज उसे आप बचपन की तुलना में अलग तरह से क्यों देखते हैं।
यह मौलिक पुनरावृत्ति गतिविधि है। पाठ का पूरा अध्ययन और पुस्तक के दिए प्रश्न अपनी निर्धारित NCERT प्रति से करें।
नीचे दिए प्रश्न और उत्तर अभ्यास के लिए नए लिखे गए हैं; इन्हें पिछले वर्ष के प्रश्नों की हूबहू प्रतिलिपि न समझें।
शीर्षक “सपनों के-से दिन” क्यों उपयुक्त है?
लेखक के लिए बचपन के दिन अब दूर और स्मृतिमय हो गए हैं। उनमें कठिनाई भी थी, लेकिन पीछे मुड़कर देखने पर वे सपने जैसे लगते हैं।
स्कूल के अनुभव लेखक को कैसे प्रभावित करते हैं?
अनुशासन, शिक्षकों और साथियों के अनुभव उनके डर, सीख और व्यक्तित्व को आकार देते हैं। स्मृति इन अनुभवों को भावनात्मक रूप देती है।
संस्मरण में हास्य और संवेदना का मेल कैसे है?
बचपन की शरारतें और गलतियाँ हल्का हास्य पैदा करती हैं, जबकि बच्चों के डर और शिक्षक के व्यवहार का वर्णन संवेदना जगाता है।
इस पाठ को CBSE 2026–27 पाठ्यक्रम और निर्धारित NCERT पुस्तक के अनुसार पढ़ें।