कक्षा 10 › हिंदी पाठ्यक्रम-B

NCERT स्पर्श भाग 2 · गद्य · प्रफुल्ल कुमार परवेज़ · CBSE 2026–27

तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

यह लेख गीतकार शैलेंद्र के संवेदनशील व्यक्तित्व और फिल्म “तीसरी कसम” के निर्माण को याद करता है। कला के प्रति ईमानदारी और बाजार की अपेक्षाओं के बीच संघर्ष फिल्म के अनुभव का केंद्रीय पक्ष है।

पाठ का सार और केंद्रीय भाव

यह लेख गीतकार शैलेंद्र के संवेदनशील व्यक्तित्व और फिल्म “तीसरी कसम” के निर्माण को याद करता है। कला के प्रति ईमानदारी और बाजार की अपेक्षाओं के बीच संघर्ष फिल्म के अनुभव का केंद्रीय पक्ष है।

मुख्य विचार

उत्तर लिखने का तरीका: प्रश्न का सीधा उत्तर दीजिए, पाठ की घटना/भाव से प्रमाण दीजिए और अंत में उसे मुख्य विचार से जोड़िए। अपने शब्दों में लिखें; पाठ की पंक्तियाँ लंबी न उतारें।

पढ़ने और समझने की गतिविधि

शैलेंद्र के उद्देश्य और फिल्म के व्यावसायिक परिणाम की तुलना कीजिए। कला और बाजार के बीच संतुलन पर अपनी राय लिखिए।

यह मौलिक पुनरावृत्ति गतिविधि है। पाठ का पूरा अध्ययन और पुस्तक के दिए प्रश्न अपनी निर्धारित NCERT प्रति से करें।

हल किए गए CBSE/PYQ-शैली प्रश्न

नीचे दिए प्रश्न और उत्तर अभ्यास के लिए नए लिखे गए हैं; इन्हें पिछले वर्ष के प्रश्नों की हूबहू प्रतिलिपि न समझें।

प्रश्न 1

शैलेंद्र ने “तीसरी कसम” बनाने का निर्णय क्यों लिया?

वे कहानी और उसके मानवीय संसार से गहरे प्रभावित थे। फिल्म उनके लिए व्यावसायिक योजना से अधिक एक प्रिय साहित्यिक रचना को सिनेमा में जीवित करने का प्रयास थी।

प्रश्न 2

लेख उन्हें शिल्पकार क्यों कहता है?

वे गीत और फिल्म को संवेदनशीलता, मेहनत और कलात्मक दृष्टि से गढ़ते थे। उनके काम में रचना के प्रति ईमानदारी दिखाई देती है।

प्रश्न 3

फिल्म का परिणाम कलाकार के लिए क्या सीख देता है?

कला का मूल्य केवल तत्काल कमाई से नहीं तय होता। फिर भी रचनाकार को अपने काम के आर्थिक और व्यावहारिक पक्षों की समझ रखनी चाहिए।

स्व-मूल्यांकन

इस पाठ को CBSE 2026–27 पाठ्यक्रम और निर्धारित NCERT पुस्तक के अनुसार पढ़ें।