कक्षा 10 › हिंदी पाठ्यक्रम-A

NCERT क्षितिज भाग 2 · काव्य · सूरदास · CBSE 2026–27

सूरदास के पद

पदों में गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम और विरह तथा उद्धव के ज्ञान-योग के संदेश पर उनकी प्रतिक्रिया आती है। भाव, संवाद और लोकबुद्धि के सहारे प्रेम-भक्ति की शक्ति उभरती है।

पाठ का सार और केंद्रीय भाव

पदों में गोपियों का कृष्ण के प्रति प्रेम और विरह तथा उद्धव के ज्ञान-योग के संदेश पर उनकी प्रतिक्रिया आती है। भाव, संवाद और लोकबुद्धि के सहारे प्रेम-भक्ति की शक्ति उभरती है।

मुख्य विचार

उत्तर लिखने का तरीका: प्रश्न का सीधा उत्तर दीजिए, पाठ की घटना/भाव से प्रमाण दीजिए और अंत में उसे मुख्य विचार से जोड़िए। अपने शब्दों में लिखें; पाठ की पंक्तियाँ लंबी न उतारें।

पढ़ने और समझने की गतिविधि

गोपियों और उद्धव के विचारों की तुलना तीन आधारों पर कीजिए—ज्ञान, प्रेम और अनुभव। फिर पदों से प्रमाण जोड़िए।

यह मौलिक पुनरावृत्ति गतिविधि है। पाठ का पूरा अध्ययन और पुस्तक के दिए प्रश्न अपनी निर्धारित NCERT प्रति से करें।

हल किए गए CBSE/PYQ-शैली प्रश्न

नीचे दिए प्रश्न और उत्तर अभ्यास के लिए नए लिखे गए हैं; इन्हें पिछले वर्ष के प्रश्नों की हूबहू प्रतिलिपि न समझें।

प्रश्न 1

गोपियाँ उद्धव के योग-संदेश को सहजता से क्यों नहीं स्वीकारतीं?

उनका मन कृष्ण-प्रेम में पूरी तरह रमा है। वे निर्गुण ज्ञान के उपदेश से अपने विरह और सजीव प्रेम का समाधान नहीं पातीं।

प्रश्न 2

पदों में गोपियों की वाक्पटुता कैसे दिखाई देती है?

वे उद्धव के तर्कों का उत्तर चतुर उदाहरणों और व्यंग्य से देती हैं। उनका उत्तर भावुक होने के साथ तार्किक भी है।

प्रश्न 3

सूरदास के पदों में भक्ति का कौन-सा रूप प्रमुख है?

सगुण और स्नेहपूर्ण भक्ति, जिसमें भक्त का ईश्वर से निजी, आत्मीय और भावनात्मक संबंध होता है।

स्व-मूल्यांकन

इस पाठ को CBSE 2026–27 पाठ्यक्रम और निर्धारित NCERT पुस्तक के अनुसार पढ़ें।