कक्षा 10 › हिंदी पाठ्यक्रम-A

NCERT क्षितिज भाग 2 · गद्य · रामवृक्ष बेनीपुरी · CBSE 2026–27

बालगोबिन भगत

बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी संत-जैसा जीवन जीते हैं। वे श्रम, भक्ति, सादगी और सामाजिक रूढ़ियों से स्वतंत्र सोच का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं; पुत्र-वियोग में भी उनका दृष्टिकोण जीवन और आत्मा की निरंतरता पर आधारित रहता है।

पाठ का सार और केंद्रीय भाव

बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी संत-जैसा जीवन जीते हैं। वे श्रम, भक्ति, सादगी और सामाजिक रूढ़ियों से स्वतंत्र सोच का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं; पुत्र-वियोग में भी उनका दृष्टिकोण जीवन और आत्मा की निरंतरता पर आधारित रहता है।

मुख्य विचार

उत्तर लिखने का तरीका: प्रश्न का सीधा उत्तर दीजिए, पाठ की घटना/भाव से प्रमाण दीजिए और अंत में उसे मुख्य विचार से जोड़िए। अपने शब्दों में लिखें; पाठ की पंक्तियाँ लंबी न उतारें।

पढ़ने और समझने की गतिविधि

बालगोबिन भगत के दैनिक जीवन का समय-क्रम बनाइए—खेती, गायन, भजन और परिवार। हर क्रिया के साथ उसका मूल्य लिखिए।

यह मौलिक पुनरावृत्ति गतिविधि है। पाठ का पूरा अध्ययन और पुस्तक के दिए प्रश्न अपनी निर्धारित NCERT प्रति से करें।

हल किए गए CBSE/PYQ-शैली प्रश्न

नीचे दिए प्रश्न और उत्तर अभ्यास के लिए नए लिखे गए हैं; इन्हें पिछले वर्ष के प्रश्नों की हूबहू प्रतिलिपि न समझें।

प्रश्न 1

बालगोबिन भगत का जीवन संत-जैसा क्यों कहा गया है?

वे सादगी से रहते, श्रम करते, मधुर भजन गाते और लोभ से दूर रहते थे। उनका व्यवहार करुणा और आत्मिक विश्वास से प्रेरित था।

प्रश्न 2

पुत्र की मृत्यु पर उनका दृष्टिकोण क्या था?

वे मृत्यु को आत्मा की यात्रा का अंत नहीं मानते। उनका विश्वास था कि पुत्र ने परमात्मा से मिलन पाया है; इस विचार से वे शोक को भक्ति में बदलते हैं।

प्रश्न 3

भगत के व्यक्तित्व से कौन-सा सामाजिक संदेश मिलता है?

सच्ची धार्मिकता आडंबर से नहीं, श्रम, समानता, संवेदना और आचरण से बनती है। भगत रूढ़ियों के बजाय अपने विवेक को महत्त्व देते हैं।

स्व-मूल्यांकन

इस पाठ को CBSE 2026–27 पाठ्यक्रम और निर्धारित NCERT पुस्तक के अनुसार पढ़ें।