प्रश्न 1
बिस्मिल्ला खाँ शहनाई को इबादत क्यों मानते थे?
वे संगीत को आत्मसमर्पण, अनुशासन और गहरी साधना से जोड़ते थे। रियाज़ उनके लिए रोज़मर्रा का अभ्यास नहीं, भीतर की श्रद्धा का रूप था।
NCERT क्षितिज भाग 2 · गद्य · यतीन्द्र मिश्र · CBSE 2026–27
यह संस्मरण शहनाई के उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के संगीत-साधना, बनारस से आत्मीय संबंध और सांस्कृतिक सौहार्द को रेखांकित करता है। संगीत उनके लिए पेशा भर नहीं, इबादत और जीवन की साधना है।
यह संस्मरण शहनाई के उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ के संगीत-साधना, बनारस से आत्मीय संबंध और सांस्कृतिक सौहार्द को रेखांकित करता है। संगीत उनके लिए पेशा भर नहीं, इबादत और जीवन की साधना है।
उत्तर लिखने का तरीका: प्रश्न का सीधा उत्तर दीजिए, पाठ की घटना/भाव से प्रमाण दीजिए और अंत में उसे मुख्य विचार से जोड़िए। अपने शब्दों में लिखें; पाठ की पंक्तियाँ लंबी न उतारें।
बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व का “साधना–परंपरा–सौहार्द” शीर्षकों वाला माइंड-मैप बनाइए और पाठ के प्रसंग जोड़िए।
यह मौलिक पुनरावृत्ति गतिविधि है। पाठ का पूरा अध्ययन और पुस्तक के दिए प्रश्न अपनी निर्धारित NCERT प्रति से करें।
नीचे दिए प्रश्न और उत्तर अभ्यास के लिए नए लिखे गए हैं; इन्हें पिछले वर्ष के प्रश्नों की हूबहू प्रतिलिपि न समझें।
बिस्मिल्ला खाँ शहनाई को इबादत क्यों मानते थे?
वे संगीत को आत्मसमर्पण, अनुशासन और गहरी साधना से जोड़ते थे। रियाज़ उनके लिए रोज़मर्रा का अभ्यास नहीं, भीतर की श्रद्धा का रूप था।
बनारस से उनका लगाव किस प्रकार प्रकट होता है?
गंगा, मंदिरों और शहर की सांस्कृतिक ध्वनियों से उनका गहरा भावनात्मक संबंध था। अवसर मिलने पर भी वे बनारस और अपनी परंपरा से अलग नहीं होना चाहते थे।
पाठ सांस्कृतिक एकता का उदाहरण कैसे देता है?
एक मुस्लिम कलाकार का मंदिरों और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की साझा परंपरा से जुड़ाव बताता है कि कला समुदायों को जोड़ती है।
इस पाठ को CBSE 2026–27 पाठ्यक्रम और निर्धारित NCERT पुस्तक के अनुसार पढ़ें।